कांकेर. नदी नालों की रेत से सोना निकालने वाले सोनझारी जाति के लोग अब शहरों की नालियों में दो वक्त की रोटी के लिए रेत छान रहे हैं। विगत कुछ दिनों से शहर में अन्य जिलों से आए सोनझारी जाति के लोग नालियों की रेत को छानते दिखाई दे रहे हैं। सोना निकालने नाली के किनारे रेत छानते बैठे ये लोग आने जाने वाले लोगों के लिए आकर्षण बने हुए है। धमतरी जिले के सोनझारी जाति के लोग इन दिनों कांकेर में आए हुए हैं। इनके द्वारा शहर में घूम घूम कर सोनारों के दुकानों के सामने से गुजरी नालियों में घंटों मेहनत कर रेत को छान छान कर चुटकी भर महीन रेत निकाली जा रही है। इस चुटकी भर रेत सोनझारी जाति के लोग अपनी कमाई बताते हैं। धमतरी से आए इस परिवार के 28 वर्षीय युवक भुनेश्वर सोनाझारी तथा 25 वर्षीय भंवर लाल सोनाझारी ने बताया इससे ही वे अपनी मजदूरी निकाल दो वक्त की रोटी का इंतजाम करते हैं। सोनारों के दुकानों के सामने से गुजरी नाली के रेत को घंटों छाना जाता है तथा अंत में बची रेत को गलाया जाता है। रेत को गलाने के साथ ही उसमें से सोने, चांदी तथा अन्य धातु के कण अलग अलग हो जाते हैं। जिसे सोनारों को बेच दिया जाता है। उन्होंने बताया कि दिन भर के मेहनत के बाद दो से तीन सौ रुपए तक आमदनी होती है। यह हमारा परंपरागत व्यवसाय है। बचपन से ही हमें इसे सिखाया गया है। बची हुई रेत देख कर ही पहचान कर ली जाती है कि इसमें कितना सोना निकलेगा। इस कार्य को बचपन से करते आ रहे हैं तथा पूरा परिवार इसमें जुटता है।
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